
बिलासपुर : सरकारी काम छोड़ ‘हर्बल प्रोडक्ट’ की प्रचार में मस्त पटवारी प्रियंका बैगा, 22 किमी दूर से चल रही ‘ड्यूटी’,
जीशान अंसारी की कलम से

बिलासपुर (खोंगसरा/टाटीधार/कोटा)।सूबे में कुछ सरकारी कर्मचारी अब जनसेवा भूलकर निजी कंपनियों के ‘सेल्स एजेंट’ बनते जा रहे हैं। ताजा और हैरान करने वाला मामला बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक का है। यहां खोंगसरा पारा और टाटीधार क्षेत्र में पदस्थ पटवारी प्रियंका बैगा राजस्व का काम-काज छोड़कर ‘हर्बल लाइफ’ (Herbalife Nutrition) के उत्पाद का प्रचार और ऑनलाइन वर्कआउट का प्रचार करने में ज्यादा दिलचस्पी ले रही हैं।


पटवारी मैडम के सोशल मीडिया स्टेटस इस बात की गवाही दे रहे हैं कि उन्हें किसानों के खसरे, नामांतरण और सीमांकन से ज्यादा क्रिस्टियानो रोनाल्डो और हर्बल लाइफ के ‘डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म’ में निवेश की फिक्र है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी खजाने से मोटी तनख्वाह लेने वाले कर्मचारियों को सिविल सेवा आचरण नियमों को ताक पर रखकर निजी कंपनियों की ‘ब्रांड एंबेसडर’ बनने की खुली छूट दे दी गई है?


मुख्यालय से 22 किमी दूर डेरा, किसान खा रहे दर-दर की ठोकरें :-
पटवारी की मनमानी का आलम केवल व्हाट्सएप स्टेटस तक सीमित नहीं है। नियमतः पटवारी को अपने प्रभार वाले क्षेत्र (मुख्यालय) में निवास करना चाहिए, ताकि आम जनता को सहूलियत हो। लेकिन बताया जा रहा है कि मैडम का निवास अपने कार्यक्षेत्र से लगभग 22 किलोमीटर दूर ‘बेलगहना’ में है। नतीजा यह है कि खोंगसरा और टाटीधार के ग्रामीण और किसान जमीन संबंधी छोटे-छोटे कामों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। क्षेत्र से उनकी नदारदगी चीख-चीख कर बता रही है कि ‘निजी व्यापार’ के चक्कर में शासकीय कर्तव्य कैसे बलि चढ़ रहे हैं।
सरकारी ड्यूटी के समय होटलों में पार्टियां :-
यह संक्रामक बीमारी सिर्फ एक पटवारी तक सीमित नहीं है। बिलासपुर जिले में शिक्षा और राजस्व विभाग के कई सरकारी कर्मचारी ‘हर्बल लाइफ’ की नेटवर्क मार्केटिंग और कमीशन के जाल में पूरी तरह धंस चुके हैं। आरोप तो यहां तक हैं कि ये कर्मचारी सरकारी ड्यूटी के समय भी अपनी ‘दुकान’ चमकाने में लगे रहते हैं और शहर के बड़े होटलों में आयोजित होने वाले प्रमोशनल इवेंट्स में मजे से शिरकत करते हैं।















